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Mental stress relief – The key to a comfortable life

⭐ मनुष्य जन्म के साथ ही विकास की ओर अग्रसर रहता है। इस विकास के विभिन्न पड़ाव बचपन, किशोरावस्था, युवावस्था एवं वृद्धावस्था  हैं । यह बात सर्वविदित है किंतु हम में से कई लोग जानते हुए भी जीवन के कठिन पलों को संयम, चेतना एवं वैचारिक शक्ति का सहारा लिए बिना, दिनचर्या की व्यस्तता के चलते खुद का शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य असंतुलित कर बैठते हैं।

⭐ ऐसी परिस्थिति में अभिभावक एवं गुरुजनों की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण होती है। यदि हम विपरीत परिस्थितियों या मानसिक तनाव की स्थिति में ‘समय प्रबंधन’ को महत्त्व दें तो न सिर्फ हम  खुद के बल्कि अपने बच्चों के जीवन को भी संयमित, सार पूर्ण एवं उत्कृष्ट बनाकर सन्मार्ग पर अग्रसर कर सकते हैं । 

⭐ कुछ सरल उपाय अवश्य कारगर साबित हो सकते हैं जैसे-

• नियमित व्यायाम एवं ध्यान- शारीरिक व्यायाम  एवं ध्यान  ऐसे साधन है जिससे हम अपनी वैचारिक शक्ति एवं श्वसन क्रिया को दुरुस्त कर कई बीमारियों से बच सकते हैं।

• सात्विक एवं संतुलित आहार- वर्तमान परिप्रेक्ष्य को देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि रोगाणुओं एवं विषाणुओं को हम स्वयं निमंत्रण देते हैं। फास्ट फूड हमारे खान-पान का अभिन्न अंग बन चुका है जिसमें प्रयुक्त परिरक्षक (प्रिजर्वेटिव) पदार्थ पाचन क्षमता एवं आमाशय को क्षति पहुँचाते हैं जिसके दूरगामी परिणाम अत्यंत हानिकारक साबित होते हैं।

• अच्छी ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ना-

कभी – कभी अच्छे विचारकों की पुस्तकें पढ़ लेने से सोचने की शक्ति का विकास तो होता ही है साथ ही जीवन जीने की सकारात्मक सोच भी मिलती है।

• शिष्टाचार एवं सभ्य रहन-सहन-  संयम व नियम का उचित संतुलन रखा जाए तो हमारा व्यक्तित्व एवं व्यवहार उत्कृष्ट बन सकता है जो कि सभ्य जीवन शैली का आधार है|

• इस विषय में सर्वाधिक अनिवार्य बिंदु है ‘अभिभावकों एवं विद्यार्थियों का वैचारिक संप्रेषण अथवा बातचीत।’

• यह सबसे अपरिहार्य साधन है जिससे हम बच्चों के मानसिक स्तर को संतुलित कर सकते हैं।

⭐ सुबह होती है,शाम होती है,जिंदगी यूं ही तमाम होती है,जीवन को जो सरल व सभ्य बना सके, सफलता उन्हीं के नाम होती है।

हिंदी अध्यापिका ( अंजली माथुर )

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